राशन बंद करने की धमकी से MCB में उबाल, कई पंचायतों में जबरन कर वसूली के आरोप
भरतपुर का आदेश निरस्त, फिर भी मनेंद्रगढ़ जनपद की पंचायतों में कथित वसूली जारी; जिला पंचायत CEO अंकिता सोम की भूमिका पर उठे सवाल
मनेंद्रगढ़/एमसीबी।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संपत्ति कर वसूली को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि टैक्स वसूली के लिए गरीब और सामान्य ग्रामीणों पर दबाव बनाया जा रहा है तथा कुछ ग्राम पंचायतों में कर जमा नहीं करने पर सरकारी राशन बंद किए जाने की धमकी तक दी जा रही है। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि क्या संपत्ति कर की वसूली के लिए खाद्य सुरक्षा के तहत मिलने वाले राशन को दबाव का हथियार बनाया जा रहा है?
*बरबसपुर से मनेंद्रगढ़ तक उठ रही शिकायतें।*
मनेंद्रगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों से इस तरह की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें बरबसपुर, उजियारपुर, महाराजपुर, नागपुर, लोहारी, सेमरा और लाई जैसी पंचायतों के नाम ग्रामीणों द्वारा लिए जा रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर टैक्स जमा कराने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें यह तक कहा जा रहा है कि यदि संपत्ति कर जमा नहीं किया गया तो राशन संबंधी सुविधा प्रभावित हो सकती है।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी या आदेश निरस्त होने की प्रक्रिया करना उचित होता और हुआ भी इसी जिले के भरतपुर जनपद पंचायत अंतर्गत आदेश को निरस्त किया गया पूर्व विधायक गुलाब कमरों के जनांदोलन के चेतावनी के बाद।
आदेश निरस्त, फिर भी वसूली का दबाव क्यों?
मामले को और गंभीर बनाता है जनपद पंचायत भरतपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी ज्ञापन क्रमांक 1115/पं0शाखा/ज0पं0/2026-27, दिनांक 08 अगस्त 2026।ज्ञापन के अनुसार पूर्व में जारी आदेश क्रमांक 627, दिनांक 01 जुलाई 2026 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। इस पूर्व आदेश में समर्थ पंचायत पोर्टल एवं ग्राम संपदा ऐप में संपत्ति कर संबंधी कार्यवाही को 100 प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे।अब सवाल यह है कि जब संबंधित आदेश निरस्त कर दिया गया, तो ग्रामीणों पर टैक्स जमा कराने के लिए दबाव किस आदेश के तहत बनाया जा रहा है?
जिला पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत तक जवाबदेही तय हो
मामले में जिला पंचायत CEO अंकिता सोम की प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्राम पंचायत स्तर पर टैक्स वसूली के नाम पर मनमानी या राशन बंद करने जैसी धमकियां दी जा रही हैं, तो इसकी जानकारी संबंधित उच्च अधिकारियों तक क्या नहीं पहुंचती होगी और यह सब आम लोगों को प्रताड़ित करने और जबरन कर वसुली करने हेतु किया जा रहा है।सवाल यह भी है कि क्या जिला पंचायत प्रशासन ने ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर वसूली की प्रक्रिया, कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों पर बनाए जा रहे दबाव और राशन कार्डधारकों को दी जा रही कथित धमकियों की कोई जांच कराई है?
गरीब की थाली और टैक्स की रसीद के बीच कौन बना रहा है रिश्ता?
संपत्ति कर एक अलग प्रशासनिक दायित्व है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना अलग व्यवस्था। ऐसे में दोनों को जोड़कर ग्रामीणों पर दबाव बनाने के आरोप बेहद गंभीर हैं।यदि पंचायत में राशन बंद करने की धमकी देकर टैक्स वसूली की जा रही है तो यह केवल वसूली का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारों के कथित दुरुपयोग और गरीबों के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।
10 बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी
1. क्या संपत्ति कर जमा नहीं करने पर किसी पात्र परिवार का सरकारी राशन रोका जा सकता है?
2. ग्रामीणों को राशन बंद करने की धमकी किस अधिकारी या आदेश के आधार पर दी गई?
3. भरतपुर जनपद का 01 जुलाई वाला आदेश निरस्त होने के बाद भी वसूली का दबाव क्यों?
4. मनेंद्रगढ़ जनपद की पंचायतों में कर वसूली की वर्तमान प्रक्रिया क्या है?
5. बरबसपुर, उजियारपुर, महाराजपुर, नागपुर, लोहारी, सेमरा और लाई में ग्रामीणों से कितनी राशि वसूली गई?
6. क्या प्रत्येक करदाता को विधिवत मांग-पत्र और रसीद दी जा रही है?
7. क्या गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भी समान तरीके से दबाव बनाया जा रहा है?
8. राशन बंद करने की कथित धमकी देने वाले कर्मचारियों की पहचान और जांच हुई या नहीं?
9. जिला पंचायत CEO अंकिता सोम ने मामले की कोई रिपोर्ट पंचायत स्तर से तलब की है या नहीं?
10. यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन सार्वजनिक रूप से ग्रामीणों को वास्तविक नियम और प्रक्रिया क्यों नहीं बता रहा?
ग्रामीणों की चेतावनी—“राशन को टैक्स वसूली का हथियार न बनाएं”
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि टैक्स वसूली के लिए नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाए, लेकिन गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा को दबाव का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कथित धमकियां और जबरन वसूली का सिलसिला नहीं रुका तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब निगाह जिला पंचायत प्रशासन पर है—क्या CEO अंकिता सोम इन आरोपों की जांच कराएंगी या जिस प्रकार भरतपुर जनपद पंचायत में आदेश का निरस्तीकरण हुआ वह मानेमगढ़ जनपद पंचायत में भी होगा और या तो फिर पंचायत स्तर पर चल रही कथित वसूली की शिकायतें यूं ही दबा दी जाएंगी?





