ईंधन घोटाले से लेकर एंबुलेंस की देरी, जिला अस्पताल की बदहाली और सीएमएचओ पर लगे आरोपों तक—एक के बाद एक खुलासों के बाद प्रशासन हरकत में।
मनेंद्रगढ़/एमसीबी |मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों लगातार गंभीर आरोपों और विवादों के केंद्र में बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई मामलों ने न केवल जिले की जनता को झकझोर दिया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इन मामलों की जांच जिला कलेक्टर संतन देवी जांगड़े द्वारा कराए जाने की तैयारी है, जिससे पूरे जिले की निगाहें इस जांच पर टिक गई हैं।स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में सामने आए इन मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर व्यापक बहस छेड़ दी है।
*एक के बाद एक सामने आए गंभीर मामले।*
बीते दिनों प्रकाशित खबरों में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई मुद्दे उजागर हुए 220 बिस्तरीय जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था,जहां एक बुजुर्ग मरीज को समय पर उपचार और पैर के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिलने पर निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा।108 संजीवनी एक्सप्रेस की देरी, जिसमें दुर्घटनाग्रस्त और गंभीर मरीजों को कई बार एक से दो घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।
सरकारी पेट्रोल के कथित दुरुपयोग का मामला, जिसमें सरकारी ईंधन कूपन से निजी वाहन में पेट्रोल भरवाने के आरोप लगाए गए।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ अभिनाश खरे पर विभिन्न गंभीर आरोप, जिनकी शिकायत राज्यपाल सचिवालय और भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी तक पहुंची और वहां से संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए भेजी गई।
*इन घटनाओं ने जिले के स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े किए हैं।*
जिला अस्पताल पर सबसे बड़ा प्रश्न?220 बिस्तरों वाले आधुनिक जिला अस्पताल से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि कई आवश्यक उपचार समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।एक बुजुर्ग मरीज के पैर का ऑपरेशन समय पर नहीं होने और निजी अस्पताल जाने की मजबूरी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए।लोगों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ और संसाधन उपलब्ध हैं, तो मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर क्यों जाना पड़ रहा है?
*108 एंबुलेंस सेवा पर नाराजगी*
ग्रामीण क्षेत्रों में 108 संजीवनी एक्सप्रेस की देरी लगातार शिकायत का विषय बनी हुई है। कई मामलों में दुर्घटना या गंभीर बीमारी के बाद मरीजों को घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।आम लोगों का कहना है कि गंभीर स्थिति में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचेगी तो सरकारी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य प्रभावित होगा।
*सरकारी ईंधन के उपयोग पर उठे सवाल।*
स्वास्थ्य विभाग में सरकारी ईंधन के कथित दुरुपयोग का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है आरोप लगाए गए कि सरकारी पेट्रोल कूपन का उपयोग निजी वाहन में ईंधन भरवाने के लिए किया गया।यदि जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जा सकता है। हालांकि जांच प्रक्रिया अभी ठंडे बस्ते पर है।
*सीएमएचओ अभिनाश खरे पर शिकायतें और उच्च स्तर पर संज्ञान*
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के विरुद्ध विभिन्न आरोपों को लेकर भेजे गए ज्ञापनों पर राज्यपाल सचिवालय और भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संज्ञान लिए जाने की जानकारी सामने आई है।शिकायतों में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, अस्पताल प्रबंधन, संसाधनों की कमी तथा अन्य बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
*अब क्या?? एमसीबी कलेक्टर करेंगी जांच।*
इन लगातार सामने आए मामलों के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। जानकारी के अनुसार एमसीबी कलेक्टर संतन देवी जांगड़े इन आरोपों और शिकायतों की जांच करेंगी।यदि जांच निष्पक्ष और तथ्यात्मक तरीके से होती है, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन मामलों में आरोप सही हैं।
*किन किन स्तरों में लापरवाही हुई या यूं कहें भ्रष्टाचार हुआ अब उन बातों पर ध्यान देते हैं*
क्या सरकारी धन या संसाधनों का दुरुपयोग हुआ क्या सही में प्राइवेट वाहनों पर सरकारी रुपयों का खर्च किया जा रहा है या मानक से अधिक उपयोग हो रहा है।स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए क्या इसी प्रकार से सरकारी पैसो और सरकारी वस्तुओं,का गलत दुरुपयोग होता रहेगा या जिम्मेदारी और कर्तव्य भी याद रहेगा यह कौन तय करेगा भ्रष्ट अधिकारी।
एमसीबी जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लगातार सामने आए मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। अब सबकी नजर कलेक्टर संतन देवी जांगड़े द्वारा कराई जाने वाली जांच पर है। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि आरोपों में कितना दम है, किन स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।





