मनेन्द्रगढ़ समेत कई जिलों में डेढ़-दो घंटे देरी से पहुँच रही एम्बुलेंस, ग्रामीणों में भारी आक्रोश; स्वास्थ्य विभाग और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
विशेष संवाददाता, रायपुर
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेशवासियों को त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई 108 ‘संजीवनी एक्सप्रेस’ सेवा इन दिनों अपनी लचर कार्यप्रणाली को लेकर कटघरे में है। सड़क हादसों जैसे अति-संवेदनशील मामलों में, जहाँ हर एक सेकंड किसी की जिंदगी तय करता है, वहाँ एम्बुलेंस का घंटों न पहुँचना अब प्रदेश के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आम बात होती जा रही है।
ताज़ा मामला मनेन्द्रगढ़-चिर्मिरी-भरतपुर (MCB) जिले का है, जहाँ 108 एम्बुलेंस सेवा की घोर लापरवाही से ग्रामीणों में भारी असंतोष और आक्रोश का माहौल है।
निजी वाहनों के भरोसे गंभीर घायल
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि दुर्घटना की सूचना देने के बाद भी 108 एम्बुलेंस डेढ़ से दो घंटे तक मौके पर नहीं पहुँचती। ऐसे में गोल्डन आवर (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) बीत जाता है, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है।
”हादसे के बाद जब तुरंत मदद की जरूरत होती है, तब कॉल सेंटर से सिर्फ आश्वासन मिलता है। थक-हारकर ग्रामीणों को निजी वाहनों या ऑटोरिक्शा का प्रबंध कर घायलों को अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार सही समय पर इलाज न मिलने से स्थिति बेहद नाजुक हो जाती है।”
— स्थानीय राकेश सिंह, मनेन्द्रगढ़

’स्वास्थ्य मंत्री के प्रभाव वाले क्षेत्र में यह हाल, तो बाकी प्रदेश का क्या?’
ग्रामीणों ने जिला स्वास्थ्य प्रशासन की भूमिका और कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल दागे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी मूलभूत जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिले में स्वास्थ्य मंत्री का सीधा प्रभाव और ध्यान होने के बावजूद यदि आपातकालीन एम्बुलेंस व्यवस्था की स्थिति इतनी दयनीय है, तो राज्य के दूरदराज के अन्य वनांचल जिलों का क्या हाल होगा? यह पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
राज्य सरकार और प्रशासन से प्रमुख माँगे
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य शासन एवं उच्च अधिकारियों से निम्नलिखित कदम उठाने की माँग की है:
- निष्पक्ष जाँच: 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवा का संचालन कर रही एजेंसी और स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच हो।
- रिस्पॉन्स टाइम में सुधार: कॉल मिलने के न्यूनतम समय (15-20 मिनट) के भीतर एम्बुलेंस घटना स्थल पर पहुँचने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- सख्त कार्रवाई: एम्बुलेंस सेवा में देरी या लापरवाही बरतने वाले दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
- एम्बुलेंसों की संख्या में वृद्धि: जिले और संवेदनशील रूटों पर आपातकालीन वाहनों की उपलब्धता बढ़ाई जाए।
अब देखना यह होगा कि राजधानी रायपुर से स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं, या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं यूँ ही कागजों और आश्वासनों तक सीमित रहेंगी।





