सूत्रों के हवाले से विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई का इंतजार।
मनेंद्रगढ़।एमसीबी जिले का शिक्षा विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारियों के अनुसार शिक्षकों के प्रशिक्षण में लापरवाही, अधिकारियों की कार्यशैली, स्कूलों की बदहाल स्थिति, डिजिटल उपस्थिति प्रणाली के कथित दुरुपयोग और पुरस्कार प्रक्रिया में लेन-देन की चर्चाओं सहित कई ऐसे मुद्दे सामने आए हैं, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
नई किताबें, लेकिन शिक्षकों को नहीं मिला प्रशिक्षण।
सूत्रों के मुताबिक माध्यमिक स्कूलों में नया पाठ्यक्रम और नई पुस्तकें लागू कर दी गई हैं, लेकिन शिक्षकों को अब तक आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में बिना तैयारी के पढ़ाई कराने की स्थिति बन गई है, जिसका असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
डीईओ की नियमित उपस्थिति पर सवाल।
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यालय में नियमित उपस्थिति नहीं रहने से विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले शिक्षक और आम नागरिक घंटों इंतजार करने के बाद भी अपने कार्य नहीं करा पा रहे हैं।
वीएसके ऐप पर हाजिरी, स्कूलों से दूरी?
सूत्रों के अनुसार कुछ कर्मचारी ‘विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)’ ऐप पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के बाद स्कूलों में समय देने के बजाय कार्यालयों में ही दिन बिताते हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो डिजिटल निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े होंगे।
‘नेक्स्ट टू डीईओ’ बताकर दबदबा बनाने की चर्चा।
विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि एक अधीनस्थ अधिकारी स्वयं को “नेक्स्ट टू डीईओ” बताकर प्रभाव स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इससे कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच असहजता और असंतोष का माहौल बनने की बात कही जा रही है।
बारिश में टपक रहे स्कूल, कार्रवाई अब भी नहीं
लगातार बारिश के बीच जिले के कई शासकीय स्कूलों की छतों से पानी टपकने और भवनों के जर्जर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बार आवेदन दिए जाने के बावजूद मरम्मत और सुरक्षा को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
राज्यपाल पुरस्कार पर भी उठे सवाल।
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि राज्यपाल पुरस्कार के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कथित लेन-देन की बातें सामने आने लगी हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो पुरस्कार की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
50 विद्यार्थियों के नाम काटने का मामला ठंडे बस्ते में।
सूत्रों के अनुसार एक प्राथमिक विद्यालय में बीच सत्र के दौरान लगभग 50 विद्यार्थियों के नाम काटे जाने का मामला अब तक जांच का इंतजार कर रहा है। कार्रवाई में देरी से प्रभावित विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
बड़ा सवाल
जब शिक्षा विभाग का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करना है, तब यदि सूत्रों के दावों में सच्चाई है तो इन मामलों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक होगा।





