मनेंद्रगढ़। रेलवे स्टेशन के समीप इन दिनों सट्टा पट्टी का अवैध कारोबार पूरी तरह से पैर पसार चुका है। यहाँ कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए खुलेआम, बेखौफ होकर सट्टे की पट्टियां काटी जा रही हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस की ‘दस्तक’ यहाँ पूरी तरह नदारद है। खाईवाल और बुकी सरेआम आम जनता और युवाओं को कंगाल करने में जुटे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है। बिक्की बना नया ‘बादशाह’, राजू-मुनि और नौआ संभाल रहे कमान सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस पूरे काले कारोबार को एक सोची-समझी रणनीति और मजबूत सिंडिकेट के जरिए संचालित किया जा रहा है। सट्टे के इस खेल में राजू, मुनि और नौआ के साथ मिलकर बिक्की इस समय इलाके का नया ‘बादशाह’ बना बैठा है। इसके इशारे पर स्टेशन के आसपास के इलाकों में धड़ल्ले से दांव लगवाए जा रहे हैं। जुगलबंदी और सिंडिकेट: बंडू-पुत्तू की कहानी, सुहैल के साथ जफीर इस अवैध नेटवर्क का ताना-बाना बेहद मजबूत है। ग्राउंड लेवल पर बंडू के साथ पुत्तू की जुगलबंदी और दूसरी तरफ सुहैल के साथ जफीर का गठजोड़ इस सट्टा बाजार को लगातार खाद-पानी दे रहा है। सट्टे की रकम की वसूली और पट्टियों के मिलान का काम इन्हीं गुर्गों के हवाले है। मुनाफे की अंधी दौड़: गम में डूबे कल्लू और बबुआ सट्टे की इस अंधी दुनिया में जहाँ सरगना नोट छाप रहे हैं, वहीं इस दलदल में फंसकर कुछ मोहरे पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। चर्चा है कि भारी घाटे और ‘गम’ में डूबे कल्लू और बबुआ की हालत इस समय पतली है। लेकिन सिंडिकेट को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, इनका खेल ‘यहाँ से शुरू और वहाँ खत्म’ यानी बिना रुके चौबीसों घंटे जारी है। कार्रवाई के रडार पर ‘अभिषेक और चांटी’, पीछे खड़ा है वड्डे इस पूरे खेल को कथित तौर पर कुछ रसूखदारों का भी संरक्षण प्राप्त है, जिसके दम पर यह धंधा पुलिस की नाक के नीचे चल रहा है। कार्रवाई के रडार और स्थानीय चर्चाओं के घेरे में अभिषेक और चांटी का नाम प्रमुखता से आ रहा है। वहीं, इस सिंडिकेट को पीछे से बैकअप देने और संरक्षण देने के लिए वड्डे भी इनके साथ मजबूती से खड़ा नजर आ रहा है। बिलासपुर ‘सट्टा किंग’ से जुड़े तार, रोज लग रहे लाखों के दांव खुलासा: मनेंद्रगढ़ का यह सट्टा कारोबार सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। यहाँ के स्थानीय सटोरियों और खाईवालों के तार सीधे सट्टा किंग बिलासपुर से जुड़े हुए हैं। रोज शाम होते ही लाखों-करोड़ों की पट्टियों का हिसाब बिलासपुर पार भेजा जा रहा है, जो एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है। प्रशासन का मौन, जनता में भारी आक्रोश स्टेशन जैसे व्यस्त और सार्वजनिक क्षेत्र के पास खुलेआम चल रहे इस सट्टा बाजार ने स्थानीय युवाओं और मजदूर वर्ग को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। बावजूद इसके, जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि इस सिंडिकेट पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाए।
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स्टेशन रोड पर सट्टेबाजों का ‘ओपन चैलेंज’, पुलिस की ‘दस्तक’ गायब मनेंद्रगढ़ में सट्टा किंग का खुला खेल, बिलासपुर तक जुड़े हैं अवैध कारोबार के तार।
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