आस्था के रंग में रंगा वनांचल, गणपति बप्पा के जयकारों से गूंज रहा मनेंद्रगढ़

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प्रदीप पाटकर।गणपति उत्सव ने वनांचल में भक्ति, उल्लास और सामाजिक एकजुटता की नई तस्वीर पेश की है। नागपुर, बेलबहरा, बरबसपुर से लेकर मनेंद्रगढ़ शहर तक जगह-जगह स्थापित गणपति प्रतिमाओं के सामने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह की आरती से लेकर शाम की पूजा-अर्चना और जयकारों तक पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आ रहा है।गणेश उत्सव केवल प्रतिमा स्थापना और पूजा तक सीमित नहीं है। यह वह अवसर है जब मोहल्ले, गांव और शहर की अलग-अलग गलियां एक साझा उत्सव में बदल जाती हैं। “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष के बीच उम्र, वर्ग और सामाजिक दूरी की दीवारें छोटी पड़ जाती हैं और सामूहिक आस्था बड़ी हो जाती है।वनांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में भी उत्सव की अपनी खास रंगत दिखाई दे रही है। नागपुर, बेलबहरा और बरबसपुर जैसे इलाकों में श्रद्धालुओं ने अपनी परंपराओं और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप गणपति की आकर्षक झांकियां सजाई हैं। वहीं मनेंद्रगढ़ शहर में विभिन्न स्थानों पर पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों से उत्सव का माहौल बना हुआ है।इस उत्सव की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि भक्ति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी रहे। आयोजन समितियां स्वच्छता, यातायात व्यवस्था, ध्वनि की मर्यादा और सार्वजनिक स्थानों की व्यवस्था का ध्यान रखें तो उत्सव की गरिमा और बढ़ेगी। प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी भी है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल मिले।
गणपति बप्पा विघ्नहर्ता माने जाते हैं। इसलिए इस उत्सव की सार्थकता सिर्फ जयकारों की गूंज में नहीं, बल्कि समाज से आपसी वैमनस्य, अव्यवस्था और उदासीनता जैसे विघ्न दूर करने के संकल्प में भी है।वनांचल की धरती पर इस बार गणपति उत्सव आस्था के साथ एकता का संदेश भी दे रहा है—बप्पा आए हैं तो खुशियां बांटने के साथ समाज को जोड़ने का संकल्प भी मजबूत होना चाहिए। 

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